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परीक्षा में धांधली केवल लक्षण है, असली बीमारी गैरजवाबदेही: मुख्यमंत्री को सुधार पत्र

परीक्षा संकट से जवाबदेह झारखंड तक: मुख्यमंत्री को लिखा  15 संस्थागत सुधारों का पत्र

5 अगस्त 2026 को मैंने राष्ट्रीय नागरिक निर्माण अभियान (NCBC) के संस्थापक के रूप में झारखंड के मुख्यमंत्री को एक विस्तृत संस्थागत सुधार पत्र लिखा ।

इस पत्र का उद्देश्य किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या वर्तमान सरकार पर आरोप लगाना नहीं है। इसका उद्देश्य झारखंड की उन समस्याओं के मूल कारण की ओर ध्यान दिलाना है, जो सरकारें बदलने के बाद भी बनी रहती हैं।

आज राज्य के युवा परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित धांधली, अनियमितता, विलंब तथा अपारदर्शिता के विरुद्ध आंदोलन कर रहे हैं। इन घटनाओं को केवल किसी एक परीक्षा, आयोग अथवा भर्ती एजेंसी से जुड़ा विवाद मानना पर्याप्त नहीं होगा।

परीक्षा में धांधली बीमारी नहीं है। यह बीमारी का लक्षण है।

असली बीमारी है—राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त गैरजवाबदेही, गैरजिम्मेदारी और ऐसी संस्थागत संस्कृति, जिसमें गंभीर विफलता के बाद भी जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होती।

एक अभ्यर्थी किसी परीक्षा में केवल उत्तर नहीं लिखता। वह उसमें अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष, परिवार की सीमित आय, माता-पिता की आशा और अपने भविष्य का विश्वास लगाता है। जब प्रश्नपत्र लीक, संगठित नकल, मूल्यांकन में अनियमितता या परिणाम में अपारदर्शिता की आशंका उत्पन्न होती है, तो केवल एक भर्ती प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती—लोकतांत्रिक संस्थाओं पर नागरिक का भरोसा भी कमजोर होता है।

यही गैरजवाबदेही शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, पुलिस, सार्वजनिक निर्माण और नागरिक सेवाओं में भी दिखाई देती है। विद्यालय भवन बनते हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षक और सीखने की गुणवत्ता नहीं होती। अस्पताल भवन होते हैं, लेकिन डॉक्टर, दवा और उपकरण उपलब्ध नहीं होते। कहीं पुल बन जाता है, लेकिन संपर्क सड़क नहीं बनती। कहीं सड़क बनती है, लेकिन आवश्यक पुल नहीं बनता। अनेक सरकारी भवन और परिसंपत्तियाँ वर्षों तक अनुपयोगी पड़ी रहती हैं।

नागरिक पेंशन, राशन, छात्रवृत्ति, प्राथमिकी, भूमि-अभिलेख और अन्य सेवाओं के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भटकता रहता है। शिकायत दर्ज होने के बाद भी उसे यह पता नहीं चलता कि कार्रवाई कहाँ रुकी है, जिम्मेदार अधिकारी कौन है और अंतिम निर्णय कब होगा।

लोकतंत्र की आत्मा जवाबदेही है।

अधिकार तभी वास्तविक होते हैं, जब नागरिक को समय पर सेवा मिले, शिकायत दर्ज करने का अधिकार हो, कार्रवाई दिखाई दे, अपील उपलब्ध हो और गलती या अन्याय के लिए जिम्मेदारी तय हो।

इसी दृष्टि से मुख्यमंत्री सचिवालय को सौंपे गए पत्र में 15 परस्पर जुड़े संस्थागत सुधार प्रस्ताव रखे गए हैं।

1. सभी विवादित परीक्षाओं की स्वतंत्र एवं समयबद्ध जाँच

वर्तमान तथा पिछली उन सभी परीक्षाओं को एकीकृत जाँच के दायरे में लेने का आग्रह किया गया है, जिन पर गंभीर और दस्तावेजित प्रश्न उठे हैं।

जाँच केवल परीक्षा केंद्र या निचले कर्मचारी तक सीमित न हो। प्रश्न निर्माण, मुद्रण, डिजिटल अभिरक्षा, एजेंसी चयन, OMR अथवा डिजिटल डेटा, मूल्यांकन, परिणाम और नियुक्ति तक पूरी शृंखला की जाँच हो।

जिन परीक्षाओं की निष्पक्षता स्थापित न हो सके, उन्हें विधिसम्मत प्रक्रिया से रद्द कर समयबद्ध पुनर्परीक्षा कराई जाए। जिनकी वैधता सिद्ध हो, उनमें ईमानदार सफल अभ्यर्थियों के अधिकार सुरक्षित रखे जाएँ।

2. सभी रिक्त पदों के लिए राज्यव्यापी एकीकृत भर्ती अभियान

राज्य के विभागों, विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, बोर्डों, निगमों और स्थानीय निकायों के सभी स्वीकृत तथा रिक्त पद सार्वजनिक किए जाएँ।

समान योग्यता और समान स्तर वाले पदों के लिए साझा प्रारंभिक अथवा पात्रता परीक्षा हो सकती है। तकनीकी और विशिष्ट पदों के लिए अलग विषयगत या व्यावसायिक चरण रखा जाए।

एकीकृत परीक्षा का अर्थ सभी पदों के लिए एक प्रश्नपत्र नहीं, बल्कि रिक्ति, पंजीकरण, आवेदन, परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति को एक व्यवस्थित तथा समयबद्ध साझा प्रणाली में लाना है।

3. दोषियों की संपत्ति-जाँच और युवा कौशल विकास कोष

परीक्षा और भर्ती अनियमितताओं में जिन अधिकारियों, एजेंसियों या नेटवर्क की संलिप्तता विधिसम्मत जाँच में प्रमाणित हो, उनकी आय, संपत्ति और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जाँच हो।

अवैध रूप से अर्जित और न्यायिक प्रक्रिया के बाद राज्य में निहित संपत्ति को युवा कौशल विकास कोष में जमा कर प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप, तकनीकी प्रयोगशालाओं और रोजगार सहायता पर खर्च किया जाए।

4. झारखंड अभ्यर्थी अधिकार कानून

अभ्यर्थी को केवल आवेदनकर्ता नहीं, बल्कि अधिकार-संपन्न नागरिक माना जाए।

परीक्षा कैलेंडर, स्थिर नियम, उचित शुल्क, उत्तरकुंजी, आपत्ति, समयबद्ध परिणाम, शिकायत, अपील, पुनर्परीक्षा और परीक्षा रद्द होने पर उचित राहत को कानूनी अधिकार बनाया जाए।

5. स्वायत्त कौशल एवं अप्रेंटिसशिप प्राधिकरण

कौशल विकास को प्रशिक्षण संख्या और प्रमाणपत्र तक सीमित न रखा जाए।

प्रशिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन इस आधार पर हो कि छह और बारह महीने बाद कितने युवाओं को वास्तविक रोजगार, आय, अप्रेंटिसशिप या उद्यम का अवसर मिला।

6. शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए स्वतंत्र नियामक

शिक्षा और स्वास्थ्य को आवश्यक सार्वजनिक सेवा घोषित किया जाए।

सरकारी और निजी—दोनों प्रकार के संस्थानों पर समान गुणवत्ता-मानक लागू हों। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी प्रवेश तथा नियुक्ति परीक्षाएँ समय पर, निष्पक्ष और धांधली-मुक्त हों।

7. पंचायत को नागरिक सेवाओं का वास्तविक केंद्र

प्रमाणपत्र, पेंशन, राशन, छात्रवृत्ति, श्रमिक पंजीकरण, आवास, भूमि-अभिलेख और अन्य सेवाएँ पंचायत स्तर पर उपलब्ध हों।

नागरिक की फाइल आगे बढ़े—नागरिक को दफ्तर-दफ्तर न भटकना पड़े।

8. नागरिक शिकायत एवं जवाबदेही अधिकार कानून

ऐसी कानूनी व्यवस्था बने, जिसके माध्यम से कोई भी नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कर सके, विशिष्ट पंजीकरण संख्या प्राप्त करे और कार्रवाई की स्थिति देख सके।

केवल शिकायत को किसी दूसरे कार्यालय में भेज देना समाधान न माना जाए। समयबद्ध और कारणयुक्त निर्णय अनिवार्य हो तथा अनुचित विलंब पर अधिकारी की जवाबदेही तय हो।

9. सभी प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों का अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण

सामाजिक अंकेक्षण केवल खर्च का नहीं, बल्कि योजना की वास्तविक उपयोगिता और परिणाम का हो।

यह जाँचा जाए कि पुल के साथ सड़क है या नहीं, भवन उपयोग में है या नहीं, अस्पताल में डॉक्टर और उपकरण हैं या नहीं तथा विद्यालय में शिक्षक उपलब्ध हैं या नहीं।

झारखंड आंदोलनकारियों, सेवानिवृत्त अधिकारियों, अभियंताओं, चिकित्सकों, शिक्षकों और नागरिक समाज के प्रतिबद्ध लोगों का पारदर्शी नागरिक अंकेक्षक बैंक बनाया जाए।

10. स्वच्छ पर्यावरण और जल-जंगल-जमीन का वैधानिक अधिकार

स्वच्छ हवा, सुरक्षित जल और स्वस्थ पर्यावरण को लागू कराया जा सकने वाला नागरिक अधिकार बनाया जाए।

अवैध बालू उत्खनन, वनों की कटाई, असंतुलित खनन, औद्योगिक प्रदूषण और जलस्रोतों की क्षति पर समयबद्ध शिकायत, जाँच, रोक और पुनर्स्थापन की व्यवस्था हो।

11. न्याय और अधिकार-संरक्षण संस्थाओं को निरंतर कार्यशील रखना

राज्य सूचना आयोग, लोकायुक्त, उपभोक्ता आयोग और अन्य वैधानिक संस्थाएँ अध्यक्ष, सदस्य अथवा कर्मचारियों की रिक्तियों के कारण निष्क्रिय न रहें।

न्याय में अनावश्यक विलंब व्यक्ति की गरिमा को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।

12. विस्थापित परिवारों के लिए अंतरपीढ़ी सुरक्षा

विस्थापन का समाधान केवल एकमुश्त मुआवजा नहीं हो सकता।

परियोजना की आय, लाभ या रॉयल्टी का हिस्सा विस्थापित परिवारों और उनकी आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, आवास तथा उद्यमिता के लिए सुरक्षित किया जाए।

13. प्रत्येक झारखंडी परिवार के लिए सार्वभौमिक आधारभूत आय

संसाधन-संपन्न झारखंड में किसी परिवार को शून्य आय पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

विधि द्वारा परिभाषित प्रत्येक झारखंडी परिवार को नियमित और अधिकार-आधारित आधारभूत आय देने के लिए कानून तथा प्राकृतिक संसाधन लाभांश कोष बनाया जाए।

यह राशन, पेंशन, सार्वजनिक शिक्षा, स्वास्थ्य या रोजगार अधिकार का स्थान न ले, बल्कि न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा का आधार बने।

14. विधायक वेतन को प्रति व्यक्ति आय से जोड़ना

जनप्रतिनिधियों का सम्मान और गरिमापूर्ण पारिश्रमिक आवश्यक है। लेकिन यह विसंगति उचित नहीं कि विधायक वेतन और भत्ते देश के ऊँचे स्तरों में हों, जबकि राज्य की प्रति व्यक्ति आय निम्न स्तरों में बनी रहे।

विधायक पारिश्रमिक को राज्य की प्रति व्यक्ति आय, वास्तविक आर्थिक वृद्धि और वित्तीय स्थिति से जोड़ने के लिए पारदर्शी कानून बनाया जाए।

15. समय-सीमा और वार्षिक सार्वजनिक जवाबदेही

हर वर्ष विधानसभा में एक समेकित नागरिक अधिकार एवं संस्थागत जवाबदेही प्रतिवेदन रखा जाए।

इसमें परीक्षा-जाँच, भर्ती, दोषियों पर कार्रवाई, कौशल के परिणाम, शिक्षा-स्वास्थ्य गुणवत्ता, शिकायत निवारण, सामाजिक अंकेक्षण, पर्यावरणीय अधिकार, वैधानिक संस्थाओं, विस्थापन, सार्वभौमिक आय और विधायक पारिश्रमिक की प्रगति सार्वजनिक हो।

यह किसी एक दल के विरुद्ध पत्र नहीं है

यह पत्र किसी व्यक्ति, दल या सरकार के विरुद्ध राजनीतिक आरोप-पत्र नहीं है।

झारखंड में रही सभी सरकारों और राजनीतिक व्यवस्थाओं की सामूहिक विफलताओं से सीख लेकर वर्तमान सरकार एक नई संस्थागत शुरुआत कर सकती है।

युवाओं का आक्रोश केवल एक परीक्षा रद्द कराने की माँग नहीं है। वे यह भरोसा माँग रहे हैं कि ईमानदार मेहनत का मूल्य होगा, रिक्त पद समय पर भरेंगे, सरकारी संस्था गलती करेगी तो जिम्मेदारी तय होगी और राज्य उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, न्याय, पर्यावरण, गरिमा तथा भविष्य को प्राथमिकता देगा।

मुख्यमंत्री को लिखा गया पूरा पत्र पढ़ें/ डाउनलोड करें

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